मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 132

किएरन की नज़र से

“किएरन, प्लीज़—” माँ की आवाज़ सर्दियों की हवा को चीरती हुई हमारे बीच आ गई, उसकी साँसें धुएँ-सी भाप बनकर तैर रही थीं। “उसके पास जाने को कहीं नहीं है। ठंड जमाने वाली है। बस आज की रात के लिए—”

“नहीं।” शब्द सपाट था, आख़िरी, उसकी विनती को ऐसे काटता हुआ जैसे रेशम को चाकू।

“बस एक रा...

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